'दिल, दिमाग व गर्भ तक दिखा प्रदूषण का असर'

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  • विशेषज्ञों ने स्ट्रेस, एंग्जायटी व डिप्रेशन में वृद्धि बताई
  • कहा, सावधानी नहीं बरती तो स्वास्थ्य दोष संभव

गुरुग्राम, 13 नवम्बर (संजय):
बढ़ते वायु प्रदूषण का असर दिल व दिमाग पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो हवा में प्रदूषित कण दिल, दिमाग से लेकर गर्भ तक असर डालते हैं, जो एक वक्त ऐसा आता है जब मरीज अपने घर नहीं, अस्पताल में रहने को मजबूर हो जाते हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो प्रदूषण के सूक्ष्म कण पदार्थ (पीएम-2.5) व जहरीली गैसों जैसे प्रदूषकों के संपर्क में आने से कई प्रकार की मनोवैज्ञानिक व भावनात्मक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा बार-बार मरीज को दिक्कत के अलावा अन्य समस्याएं पैदा होती हैं। प्रदूषण के कारण ऐसे मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।

पारस हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अमित भूषण शर्मा ने बताया कि प्रदूषण का असर केवल दिमाग ही नहीं बल्कि दिल पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर प्रदूषण स्तर बढ़ने के बाद दिल के मरीजों में हार्ट अटैक व चक्कर आने जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। इसलिए दिल के मरीजों को प्रदूषण से बचने व सावधानी बरतने की विशेष हिदायत दी जाती है।

मार्मलेस्ली की फाउंडर डायरेक्टर एवं सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. ज्योति कपूर ने बताया कि वायु प्रदूषण में लंबे समय तक रहने से स्ट्रेस, एंग्जायटी व डिप्रेशन में वृद्धि देखी गई है। वायु प्रदूषण के दौरान सूक्ष्म कण खून में प्रवेश कर सकते हैं और मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैं। इन कणों की वजह से मस्तिष्क में सूजन हो सकती है तथा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस उत्पन्न होता है।

वहीं पारस हॉस्पिटल की गायनेकोलॉजी विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. ऋतु सेठी ने बताया कि प्रदूषण केवल दिल और दिमाग ही नहीं बल्कि गर्भ तक प्रभावित करता है। रिसर्च के मुताबिक पीएम-2.5 के जहरीले रसायन महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। इससे लंबे समयावधि तक रहने से प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।